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    Friday, 14 April 2017

    मोदी को रोकने, देश बचाने के लिए बने देशभक्त मोर्चा: डीपी त्रिपाठी

    सोनिया गांधीअगर मोदी के ख़िलाफ़ वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष को कामयाब करना है तो सभी विपक्षी दलों को साथ मिलकर ये लड़ाई लड़नी होगी.
    आज की तारीख़ में राजनीतिक यथार्थ तो यही कहता है. इस संदर्भ में मायावती का ईवीएम के ख़िलाफ़ संघर्ष के लिए किसी भी दल से हाथ मिलाने का बयान स्वागत योग्य है.ईवीएम के मसले पर विपक्ष की एकता इसमें दिखी है. कांग्रेस के नेतृत्व में सभी गैर-भाजपा विपक्षी दल चुनाव आयोग और राष्ट्रपति के पास भी गए. इस लड़ाई को सिर्फ़ ईवीएम तक सीमित नहीं रखना चाहिए.
    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि आज के हालात में कांग्रेस के बिना मोदी का विकल्प नहीं बन सकता. लेकिन सिर्फ़ कांग्रेस से ही विकल्प नहीं बन सकता.
    कांग्रेस अकेले कुछ नहीं कर सकती. सभी छोटी, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों को साथ मिलाकर चलना होगा. दुर्भाग्य की बात ये है कि कांग्रेस अभी इस असलियत को नहीं समझ रही है, जितनी जल्दी समझ ले उतना बेहतर रहेगा.2019 में भाजपा के ख़िलाफ़ अगर सभी पार्टियां एक साथ आती हैं तो उनकी कोशिश होगी कि एक नए कार्यक्रम के तहत लोगों के विकास के लिए नीति बनाएं.
    ज़रूरी नहीं है कि विपक्षी पार्टियों के साथ आने को महागठबंधन कहा जाए, ये 'देशभक्त मोर्चा' भी हो सकता है.आज मोदी सरकार की वजह से देश टूटने का ख़तरा है. जानवरों के लिए इंसानों को मारा जा रहा है. ये काम हिंदुस्तान में कभी नहीं हुआ.
    देश बचाने के लिए देशभक्त मोर्चा बन सकता है. आज लोगों के खाने-पीने के शौक पर हमला हो रहा है. मौलिक अधिकारों पर हमला हो रहा है.भाजपा के पुराने साथी रहे नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक या मायावती अगर मोदी को रोकने के लिए बने महागठबंधन में साथ आते हैं तो इसे ऐसे देखने की ज़रूरत है कि कई बार कुछ साथी साथ होते हैं कुछ नहीं.
    1967 में दोनों वामपंथी पार्टियां जनसंघ के साथ समर्थन में थीं. आज की तारीख़ में जो लोग मोदी और भाजपा की विचारधारा के ख़िलाफ़ खड़े हैं, उन्हें एक होना होगा.
    साथ आने को लेकर कई राजनीतिक दल सहमत भी होंगे. सभी पार्टियों को एक साथ विलय करने की ज़रूरत नहीं है. सब अपनी-अपनी पहचान रखते हुए भी एक साझा कार्यक्रम के तहत साथ आ सकते हैं.विपक्षी दलों के साथ आने की शुरुआत हो भी चुकी है. शरद पवार की आत्मकथा के लोकार्पण कार्यक्रम में कई विपक्षी दल मौजूद थे.
    कांग्रेस के साथ एनसीपी के विलय की बात अगर करें तो मैंने सालों पहले कहा था कि हम अपने को कांग्रेस में समाहित नहीं करेंगे. कांग्रेस के साथ मिलकर हम लड़ेंगे. कांग्रेस के साथ विलय नहीं होगा लेकिन लय बनी रहेगी.

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